सुधा एस नम्बूदरी
दो दिसम्बर 2009 को लुई क्रूज के जहाज एम वी एक्वामैरीन के अपने घरेलू बंदरगाह से कोच्चि से मालदीव की पहली यात्रा पर निकलने के साथ ही केरल विश्व के समुद्री पर्यटन मानचित्र पर आ गया है। यह पहला पर्यटन जलयान है जो भारत से अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह की ओर रवाना हुआ है। अब भारतीय पर्यटकों को हिंद महासागर पर यात्रा करते वक्त विश्वस्तरीय सुविधायें प्राप्त हुआ करेंगी। कोच्चि कुछ वर्षों से अनेक पर्यटन यानों की मेजबानी करता आ रहा है। पिछले वर्ष वोल्वो ओशन रेस के इस बंदरगाह पर रुकने के बाद से कोच्चि ने वैश्विक नौकायन में भी मानचित्र पर अपनी जगह बना ली है ।

कोच्चि में 2 दिसम्बर 2009 को समुद्री पर्यटन का शुभारंभ करते हुए केन्द्रीय पर्यटन, आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री कुमारी सैलजा ने कहा कि इससे देश में समुद्री पर्यटन के क्षेत्र में नए युग की शुरूआत होगी और भारतीय तथा अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों को उत्कृष्ट स्तर की भारतीय और यूरोपीय शैली की सत्कार सेवा मिलेगी। उन्होंने कहा कि समुद्री पर्यटन के क्षेत्र में विकास की प्रचुर संभावनायें हैं और यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें भारत अब तक पिछड़ रहा था। कोच्चि को समुद्री पर्यटन का प्रमुख बंदरगाह बनाने के लिए पर्यटन मंत्रालय उसी प्रकार की मदद करेगा जैसी उसने वोल्वो ओशन रेस के समय की थी।

एम वी ऐक्वामैरीन लुई क्रूज़ेज़ की सहायक कंपनी लुई क्रूज़ेज़ इंडिया का जहाज है। लुई क्रूज़ेज़ विश्व का पांचवा सबसे बड़ा क्रूज आपरेटर यानी समुद्री पर्यटन का प्रचालक है। यह जहाज दिसम्बर 09 से अप्रैल 2010 तक कोच्चि बंदरगाह पर ही रहेगा और यहीं से सप्ताह में तीन दिन मालदीव और कोलंबो के त्रिकोणीय पर्यटन पर आना-जाना करेगा। केरल के पर्यटन विभाग ने कोच्चि से समुद्री पर्यटन को बढावा देने के लिये इस कंपनी के साथ अनुबंध किया है। अनुमान है कि इस मौसम में करीब 60 हजार भारतीय पर्यटक इस जहाज से पर्यटन का आनंद लेंगे। जहाज में 1200 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है । जहाज के यात्रा कार्यक्रम में कोच्चि-मालदीव-कोच्चि और कोच्चि-कोलंबो-कोच्चि के मार्ग पर पर्यटन के अलावा एक रात खुले सागर में नौकायन कार्यक्रम भी शामिल है। तीन रातों की यात्रा के पैकेज के लिये पांच हजार रुपये प्रति यात्री प्रतिदिन के हिसाब से किराया लिया जाता है। जहाज में 525 आरामदेह कमरों और सूट्स के अलावा अनेक रेस्तरां, स्वीमिंग पूल, फिटनेस सेंटर, मसाज सॉना सुविधायें , कसीनो, और कर मुक्त शापिंग की सुविधायें उपलब्ध हैं। कमरे सभी समुद्र की सतह से ऊपर हैं । जहाज में एक क्रिकेट पिच भी बनाई गई है ताकि भारतीय पर्यटक खुले समुद्र में क्रिकेट खेलने का अनोखा अनुभव प्राप्त कर सकें। जहाज पर जो भोजन और मनोरंजन परोसा जाता है, उसमें भी भारतीय स्वाद रुचि का ध्यान रखा गया है । सात डेक वाले इस जहाज की लंबाई 531 फिट है। तिरासी फिट चौड़े इस जहाज में चार एलीवेटर्स लगे हुए हैं। कुल 25 हजार 611 टन वजनी यह क्रूज़यान 17 नॉट्स की गति से हिंद महासागर पर तैरेगा।

लुई ग्रुप के अधिशासी निदेशक के अनुसार भारत में अपने कारोबार के विस्तार का कंपनी का निर्णय बढते भारतीय पर्यटन बाजार का लाभ उठाने के उद्देश्य से लिया गया है। इसका लक्ष्य परिवारों, हनीमून पर जाने वाले युवा दम्पत्तियों और कार्पोरेट क्षेत्र के लोगों सहित भारत के विशाल पर्यटक जगत को अपनी ओर आकर्षित करना है और उन्हें समुद्री पर्यटन की सुविधा उपलब्ध कराना है। विश्वव्यापी समुद्री पर्यटन गतिविधियों पर संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2000 में समुद्री पर्यटन की मांग बढक़र लगभग एक करोड़ ट्रिप्स(यात्राओं) तक पहुंच गई थी। विश्वभर में समुद्री पर्यटन की जो मांग उठी थी उसमें से दो तिहाई उत्तरी अमेरिका की यात्रा के लिये थी। इससे इस बात का पता चलता है कि समुद्री पर्यटन के विकास और विस्तार की प्रचुर संभावनायें हैं। पर्यटन मंत्रालय ने क्रिसिल इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐडवाइजरी को समुद्री पर्यटन की संभावनाओं और रणनीति का अध्ययन करने को कहा जिसकी रिपोर्ट दिसम्बर 2005 में जारी की गई। भारत में समुद्री पर्यटन की संभावना नाम की यह रिपोर्ट इस बुनियादी तथ्य के इर्द-गिर्द घूमती है कि विदेशों के आकर्षक, मोहक, ऐतिहासिक और सुन्दर स्थानों की यात्रा का यह एक नया अंदाज है।

यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि वोल्वो ओशन रेस के बाद कोच्चि को एम वी एक्वामैरीन के आदर्श गृह बंदरगाह के रूप में चुना गया है। पूर्व-पश्चिम के महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग पर स्थित यह बंदगाह आस्ट्रेलिया, सुदूर पूर्व और यूरोप के मुख्य समुद्री मार्ग से केवल 10 समुद्री मील (नॉटिकल माइल्स) की दूरी पर है और इन देशों के अलावा अन्य स्थानों से अनेक जहाज यहां आते रहते हैं। कोच्चि पोर्ट ट्रस्ट के अध्यक्ष के अनुसार कोच्चि बंदरगाह देश का पहला बंदरगाह है जिसने समुद्री पर्यटकों और जहाजों की व्यापक आवश्यकताओं को जुटाने के लिए साहसिक प्रयास किये हैं। बंदरगाह (कोच्चि) समुद्री पर्यटन वाले जहाजों के लिये अनेकों सुविधायें-यथा लंगर डालने, रियासती शुल्क और सीमा शुल्क, आव्रजन और पोर्ट स्वास्थ्य की अनुमति देने के लिये एकल खिड़की सेवा मुहैया कराई है। उद्देश्य यह है कि यूरोप से आस्ट्रेलिया के बीच पूर्व-पश्चिम व्यापार मार्ग पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधायें देने वाला यह पोर्ट समुद्री पर्यटन का प्रमुख केन्द्र बन सके।

यदि घरेलू यात्रियों और विदेशी पर्यटकों को समुद्री पर्यटन का चस्का लग गया तो वह दिन दूर नहीं जब तूतीकोरिन, गोवा और मुंबई जैसे अन्य भारतीय बंदरगाह भी होम पोर्ट बन सकेंगे, परन्तु वह तो बाद की बात है। अभी तो कोच्चि को ही लुई के 12 जहाजों के बेड़े का पहला गैर यूरोपीय आधार बनने का गौरव मिला है। पर्यटन मौसम जैसे-जैसे जोर पकड़ रहा है, आशायें बढती ज़ा रही हैं कि अधिक से अधिक पर्यटक विश्व स्तरीय समुद्री पर्यटन का आनंद लेने के लिये पानी में उतरेंगे।

औद्योगिक क्षेत्रों का पर्यावरण संबंधी आकलन
गंभीर रूप से प्रदूषित औद्योगिक क्षेप न कवेल पर्यावरण की दृष्टि से चुनौती हैं बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। भारत में 85 प्रतिशत बड़े औद्योगिक क्षेत्र स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं क्योंकि वहां के वायु, जल और भूमि प्रदूषण स्तर मानवीय बस्तियों के लिए उपयुक्त नहीं है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने देश के 88 औद्योगिक क्षेत्रों को श्रेणीबध्द करते हुए समग्र पर्यावरण आकलन मानदंड अध्ययन जारी किए हैं। इस अध्ययन के तहत जल, भूमि और वायु प्रदूषण के आधार पर समग्र पर्यावरण प्रदूषण सूचकांक तैयार किया गया। इस तरह के अध्ययन साल में दो बार किए जाते हैं।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), दिल्ली और सीपीसीबी द्वारा संयुक्त रुप से किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि 10 प्रमुख औद्योगिक स्थानों पर पर्यावरण प्रदूषण गंभीर स्तर तक पहुंच गया है। ये स्थान हैं- गुजरात में अंकलेश्वर एवं वापी, उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद और सिंगरौली, छत्तीसगढ में क़ोरबा, महाराष्ट्र में चंद्रपुर, पंजाब में लुधियाना, तमिलनाडु में वेल्लोर, राजस्थान में भिवाड़ी और उड़ीसा में अंगुल तलचर। सीपीसीबी ने पहले 24 गंभीर प्रदूषित क्षेत्रों की पहचान की थी। इसके अलावा उसने 36 और ऐसे ही क्षेत्रों की पहचान की है जहां बहुत अधिक आद्योगिक गतिविधियां थीं और साथ ही पर्यावरण प्रदूषण की समस्याएं है।

वायु गुणवत्ता सूचकांक, जल गुणवत्ता सूचकांक और भूमि गुणवत्ता सूचकांक रिकार्ड किया जा सकता है लेकिन उसमें हमेशा प्रविधि संबंधी त्रुटियों की गुजाइंश बनी रहती है। ऐसे में इस समस्या का पश्चिमी देशों की तरह ईपीआई सूचकांक बेहतर उपाय है जहां साक्षरता, जीवन प्रत्याशा और प्रति व्यक्ति आय को शामिल किया जाता है।

अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों की समस्या बहुत गंभीर है क्योंकि वहां रात उद्योगों से रातों कचरे विसर्जित कर दिये जाते हैं। गुजरात में वापी और अंकलेश्वर के प्रदूषित क्षेत्रों के गांवों में पानी काफी समय से पीने योग्य नहीं है। लोगों में अस्थमा, आखों में खुजली जैसी समस्याएं आम हैं।

सीपीसीबी ने ठोस कदम उठाने के लिए प्रदूषण की दृष्टि से समस्याग्रस्त क्षेत्रों की पहचान के लिए और राष्ट्रीय स्तर पर वायु, पानी की गुणवत्ता में सुधार एवं पारिस्थितिकीय नुकसान को दूर करने के लिए एक कार्यक्रम शुरु किया है। सीपीसीबी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के अध्यक्षों और सदस्य सचिवों की मई 1989 में बैठक हुई थी और पानी तथा वायु की गुणवत्ता में सुधार के लिए 10 अति प्रदूषित क्षेत्रों की पहचान की गयी थी। बाद में इस सूची में 14 और क्षेत्र जोड़ दिए गए। अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्र में चिह्नित क्षेत्रों के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी जिससे प्रदूषण के रोकथाम के उपाय तथा पर्यावरण की गुणवत्ता कायम करने में मदद मिलेगी।

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